Hindi travelogue Door Durgam Durust

चार महीनों से चल रही लॉकडाउन की क़ैद में हवा के झौंके सी किताब 

पाठकीय समीक्षा : दूर दुर्गम दुरुस्त  संयोग बड़े मजेदार होते है, सच में. आठ-दस दिन में दूसरी बार ये एहसास हुआ. उमेश पंत की पूर्वोत्तर…

साहित्य आज तक 2019 में घुमक्कड़ी पर चर्चा

साहित्य आजतक 2019 में ‘एवरेस्ट से भी ऊंचा’ नाम से सेशन हुआ जिसमें उमेश पंत ने भी अपनी बातें रखी. उन बातों का लब्बोलुबाब ‘आजतक’…

हमारे बीच वो लोग अभी ज़िंदा हैं : जयपुर यात्रा भाग-4

तुलिका पांडेय गोरखपुर से हैं. लखनऊ में रहती हैं. अंग्रेज़ी साहित्य में मास्टर किया है पर लिखती हिंदी में हैं. अंडमान नीकोबार आइलैंड सहित आठ…

लपक के छूना हिमालय को : ब्रह्मताल ट्रेकिंग भाग-2

विनीता यशस्वी नैनीताल से हैं. खूब घुमक्कड़ी करती हैं और देखे गए नज़ारों को शानदार तस्वीरें में भी उकेरती हैं. उत्तराखंड के ब्रह्मताल ट्रेकिंग के…

लपक के छूना हिमालय को : ब्रह्मताल ट्रेकिंग भाग-1

विनीता यशस्वी नैनीताल से हैं. खूब घुमक्कड़ी करती हैं और देखे गए नज़ारों को शानदार तस्वीरें में भी उकेरती हैं. उत्तराखंड के ब्रह्मताल ट्रेकिंग के…

हमारे बीच वो लोग अभी ज़िंदा हैं : जयपुर यात्रा भाग-3

तुलिका पांडेय गोरखपुर से हैं. लखनऊ में रहती हैं. अंग्रेज़ी साहित्य में मास्टर किया है पर लिखती हिंदी में हैं. अंडमान नीकोबार आइलैंड सहित आठ…

हमारे बीच वो लोग अभी ज़िंदा हैं : जयपुर यात्रा भाग-2

तुलिका पांडेय गोरखपुर से हैं. लखनऊ में रहती हैं. अंग्रेज़ी साहित्य में मास्टर किया है पर लिखती हिंदी में हैं. अंडमान नीकोबार आइलैंड सहित आठ…

हमारे बीच वो लोग अभी ज़िंदा हैं : जयपुर यात्रा भाग-1

तुलिका पांडेय गोरखपुर से हैं. लखनऊ में रहती हैं. अंग्रेज़ी साहित्य में मास्टर किया है पर लिखती हिंदी में हैं. अंडमान नीकोबार आइलैंड सहित आठ…

‘सियाहत’ की रवायत को आगे बढ़ाती किताब

भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से दिए जाने वाले 'नवलेखन पुरस्कार' (2017) से सम्मानित आलोक रंजन की किताब दक्षिण भारत की उनकी यात्राओं पर आधारित है.…

एक दिन मुम्बई के गोराई बीच पर

प्रशांत तिवारी उत्तर-प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है. फ़िलहाल भोपाल में रहते हैं और यात्राओं का…

मुनस्यारी के मोड़ों पर हमारे लिए ट्विस्ट था : भाग-2

लतिका जोशी पत्रकार हैं. उत्तराखंड से हैं. कहानियां और कविताएं भी लिखती हैं. उनकी यात्राओं के क़िस्से पहले भी यात्राकार पर प्रकाशित हो चुके हैं.…

दार्जिलिंग मेरे बचपन का स्विट्ज़रलैंड है : भाग-3

प्रतीक्षा रम्या कोलकाता में रहती हैं. पत्रकारिता की छात्रा रही हैं. उन्होंने कोलकाता से दार्जिलिंग की अपनी यात्रा की कहानी विस्तार से हमें लिख भेजी…

नया यात्रा वृत्तांत- नास्तिकों के देश में: नीदरलैंड

प्रवीण झा नॉर्वे (यूरोप) में रहते हैं. हिन्दी लेखन में लगातार सक्रिय हैं. पेशे से डॉक्टर हैं और मन से यायावर. संगीत से जुड़े विषयों…

दार्जिलिंग मेरे बचपन का स्विट्ज़रलैंड है : भाग-2

प्रतीक्षा रम्या कोलकाता में रहती हैं. पत्रकारिता की छात्रा रही हैं. उन्होंने कोलकाता से दार्जिलिंग की अपनी यात्रा की कहानी विस्तार से हमें लिख भेजी…

दार्जिलिंग मेरे बचपन का स्विट्ज़रलैंड है : भाग-1

प्रतीक्षा रम्या कोलकाता में रहती हैं. पत्रकारिता की छात्रा रही हैं. उन्होंने कोलकाता से दार्जिलिंग की अपनी यात्रा की कहानी विस्तार से हमें लिख भेजी…

रवीश कुमार की अमरीका यात्रा : भाग 2

रवीश कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और एनडीटीवी से जुड़े हैं. हाल ही में उन्होंने अमरीका की यात्रा की. अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने वहां…

रवीश कुमार की अमरीका यात्रा : भाग -1

रवीश कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और एनडीटीवी से जुड़े हैं. हाल ही में उन्होंने अमरीका की यात्रा की. अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने वहां…

किलों और महलों का शहर है प्राग

तृप्ति शुक्ला मीडिया से जुड़ी हैं. अक्सर मुस्कुराती हुई नज़र आती हैं. फ़ेसबुक पर अपने ‘क्वर्की वन लाइनर्स’ के लिए जानी जाती हैं. छिपी हुई…

सर्द हवाओं में लिपटा अटलांटिक का किनारा

अपूर्वा अग्रवाल आईआईएमसी से पढ़ी हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया और बिज़नेस स्टैंडर्ड में  पत्रकार रह चुकी हैं. फ़िलहाल जर्मनी में ‘डोयचे वेले’ के साथ काम…

रात में जादुई नगरी लगने लगता है बुडापेस्ट

तृप्ति शुक्ला मीडिया से जुड़ी हैं. अक्सर मुस्कुराती हुई नज़र आती हैं. फ़ेसबुक पर अपने ‘क्वर्की वन लाइनर्स’ के लिए जानी जाती हैं. छिपी हुई…

पोलैंड की वो राजधानी, जहां लोग ख़्वाब जी रहे थे

तृप्ति शुक्ला मीडिया से जुड़ी हैं. अक्सर मुस्कुराती हुई नज़र आती हैं. फ़ेसबुक पर अपने ‘क्वर्की वन लाइनर्स’ के लिए जानी जाती हैं. छिपी हुई…

ऐसे होता था भारत और तिब्बत के बीच व्यापार

सुशील बहुगुणा वरिष्ठ पत्रकार हैं और एनडी टीवी से जुड़े हैं. खासतौर पर पर्यावरण से जुड़े विषयों पर उन्होंने कई उल्लेखनीय रिपोर्ट तैयार की हैं,…

वेनिस का मशहूर घुमक्कड़ मार्कोपोलो

मार्को पोलो यूरोप के वेनिस का मशहूर घुमक्कड़ था. इस छोटे से वीडियो में जानिए दुनिया भर में मशहूर इस यात्राकार की ज़िंदगी के बारे…

प्रेम की एक कहानी है ‘गोरंग देस से गंगोत्री’

किशोर चंद्र पाटनी, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में गोरंगचौड़ नाम की जगह पर राजनीति विज्ञान के प्रवक्ता हैं. उनकी एक किताब आ रही है –…

जर्मनी पर मनोहर श्याम जोशी की उड़ती नजर

मनोहर श्याम जोशी हिंदी में एक अलग तरह की क़िस्सागोई के लिए जाने जाते हैं। ख़ास चुटीला अन्दाज़ और उसमें व्यंग्य का अनूठा तड़का, आप एक बार पढ़ना…

कहानी उस ‘देस’ की जहाँ समय स्थिर है और आदमी खर्च हो रहा है

अविनाश मिश्र : भाषा को बहुत सावधानी और ख़ूबसूरती से बरतने वाले समकालीन युवा लेख़कों में अविनाश मिश्र एक जाना-पहचाना नाम हैं। हिंदी साहित्य जगत…

ब्रेख्त और एक उदास नगर

हिंदी यात्रा-लेखन की परम्परा में निर्मल वर्मा एक बड़ी अहम कड़ी हैं। आज यात्राकार पर पढ़िए उनके यात्रा वृत्तांत ‘चीडों पर चाँदनी’ से एक अंश। …

मोहन राकेश और एक आख़री चट्टान

मोहन राकेश : वांडर लस्ट खुला समुद्र-तट। दूर-दूर तक फैली रेत। रेत में से उभरी बड़ी-बड़ी स्याह चट्टानें। पीछे की तरफ़ एक टूटी-फूटी सराय। ख़ामोश…

निर्मल वर्मा की प्रयाग यात्रा

निर्मल वर्मा : प्रयाग : 1976 मुँह अँधेरे सीटी सुनाई देती है-घनी नींद में सुराख बनाती हुई-एक क्षण पता नहीं चलता, मैं कहाँ हूँ, किस…

मोरक्कन घुमक्कड़ इब्न बतूता की भारत यात्रा

मोरक्कन यात्री इब्नबतूता का जन्म 24 फरवरी 1304 ई. को हुआ था। इनका पूरा नाम अबू अब्दुल्ला मुहम्मद था। इब्बनबतूता इनके कुल का नाम था…

अज्ञेय ने देखी एक बूँद जो सहसा उछली

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय : घुम्मकड़ी एक प्रवृत्ति ही नहीं, एक कला भी है। देशाटन करते हुए नये देशों में क्या देखा, क्या पाया, यह…

सोलांग वैली : बर्फ से बाबस्ता वो ढाई घंटे

ये एक आम ट्रिप होने जा रहा था. हम पहली रात कुल्लू (हिमांचल प्रदेश) में एक होटल बुक कर चुके थे. जिसकी बालकनी से जगमगाता…

मोदी जी याद रखियेगा जहां में नूरजहां और भी हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल अपने मन की बात में सोलर लालटेन की मदद से गाँव को रौशन करने वाली कानपुर के दरियांव की ‘नूरजहां’…

‘हंसा’ :गांव में शहर की गुपचुप घुसपैठ

हंसा। थियेटर और सिनेमा के अदाकार मानव कौल ने जब इस फिल्म को अपनी फेसबुक टाइमलाइन पे शेयर किया तो पता नहीं था कि इस…
Death Penalty Debate

हम अपने भीतर के कट्टरपंथ को फांसी क्यों नहीं दे देते ?

ऐसे मौकों पर मैं खुद को बहुत अकेला और उदास पाता हूं। मुझे नहीं पता होता कि मैं किस तरफ खड़ा होउं। मैं अपने आपको…

दस्तूरी समाज में कस्तूरी की तलाश : मसान

वो कहती है- “तुम बहुत सीधे और ईमानदार हो। बिल्कुल निदा फाज़ली की गज़लों की तरह।” वो पूछता है – “निदा फाजली, वो कौन हैं…

भारतीय समाज का ‘चेस्टिटी टेस्ट’ : ‘सेक्रेड ग्लास बाउल’

प्रिया ‘सेक्रेड ग्लास बाउल’ का जो खूबसूरत प्रतीक अपनी फिल्म में गढ़ती हैं उसका सीधा सा अर्थ यही है कि लड़कियों को हमेशा ये सिखाया…

‘ओल्ड स्कूल’ होकर भी ‘घणी बांवरी’ सी फिल्म

एक शक्ल की दो लड़कियां हैं जिनमें एक ओरिजनल है एक डुब्लिेकेट। अब असल मुद्दा ये है कि जो आॅरिजनल है वो नायक को अब…
Documentary film by Pushpa Rawat

ये ‘निर्णय’ आखिर किसका है ?

पुष्पा रावत कैमरा लेकर निकलती है निम्न मध्यवर्गीय परिवार की युवा लड़कियों की उन इच्छाओं की खोज में जिन्हें रोजमर्रा की जिन्दगी जीते हुए उनके…

सिनेमा : शटर से थियेटर तक

मैं इस वक्त उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में हूं।अपने ननिहाल में।कुछ हफ्ते भर पहले रिलीज़ हुई एनएच 10 देखने का मन है।पर अफ़सोस कि मैं उसे…

महत्वाकांक्षाओं का ‘आप’निवेशिक काल

ये राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का ‘आप’निवेशिक काल था. वो धारा जो न दक्षिणपंथी लगती थी, न वामपंथी अब वो ‘कमीनपंथी’ पर उतर आई थी. पार्टी बनाने…

हत्याओं के प्रतिशोध से गुजरता हाइवे

एन एच 10 के एक दृश्य में मीरा (अनुष्का शर्मा) हाइवे के किसी ढाबे के गंदे से टॉयलेट के दरवाज़े पर लिखे उस एक शब्द…

कसेट वाले ज़माने में मोह के धागे

बाज़ार के सामने बार-बार हारता बाॅलिवुड जब दम लगाता है तो दम लगाके हाइशा सरीखा कुछ सम्भव हो पाता है। दम लगाके हाइशा खुद को…

पीके एकदम ‘लुल’नहीं है

चलिये शुरु से शुरु करते हैं। पीके इसी भाव से शुरु होती है। एकदम नग्न। आवरणहीन। इस विशाल दुनिया के मरुस्थल में एक नंगा आदमी…

उत्तराखंड बाइक यात्रा -4

चौथा दिन : बेरीनाग-चौकौड़ी-राईआगर-गंगोलीहाट  सुबह-सुबह हम बेरीनाग से चौकोड़ी के रवाना हो गए. मौसम एकदम खुला हुआ था. आकाश एकदम साफ़ और हवा मंद मंद…

उत्तराखंड बाइक यात्रा – 3

तीसरा दिन: अल्मोड़ा-धौलछीना-सेराघाट-राईआगर-बेरीनाग सुबह के करीब साड़े नौ बजे हम अल्मोड़ा से रवाना हुए। अब तक बिना नागा भागती बाइक को अब कुछ ईंधन की…

उत्तराखंड बाइक यात्रा – 2

दूसरा दिन: नौकुचियाताल-गागर-रामगढ़-प्यूरा-अल्मोड़ा पहले दिन के सफर की थकन रात को एक अच्छी नीद में तब्दील हुई तो सुबह-सुबह आंख खुल गई। करीब साढ़े छह…

उत्तराखंड बाइक यात्रा -1

पहला दिन: दिल्ली-रामपुर-नौकुचियाताल 21 नवम्बर से 27 नवम्बर हम लगातार हिमालय का पीछा करने वाले थे। 20 तारीख की सुबह ठीक साड़े छह बजे जब…

अधूरी होकर भी मुकम्मल दुनिया

फाइन्डिंग फैनी इस स्वार्थी और व्यस्त होती जा रही दुनिया में एक ऐसी जगह की खोज की कहानी है जहां सबसे सबको मतलब होता है।…

वक्त की उंगलियों में नाचती है ज़िंदगी की कठपुतली

रात का तकरीबन नौ बज रहा था। संगीत नाटक अकादमी से बाहर निकला ही था कि मेनरोड पर एक रिक्शेवाले को अपने रिक्शे पर कपड़ा…

मैगी बनाने में १० मिनट पर सेक्स ‘टू मिनट नूडल्स’की तरह क्यूं ?

Lucknow Diary सेक्स सोसाईटी एन्ड शी…. लखनऊ में इस नाम से कोई थियेटर शो है, पहले तो ये जानकर ही जरा आश्चर्य हुआ। साथी गौरव…

आँखें खोलने की नसीहत देती ‘आँखों देखी’

दो समानान्तर रेखाएं अनन्त पर मिलती हैं। बाउजी इस बात को मानने से इनकार देते हैं। दो समानान्तर रेखाएं अगर मिल गई तो वो समानान्तर…

उन चीज़ों को खोते हुए देखना जो आपको बनाती हैं

Beasts of the southern wild हशपपी का खुद पर और जीवन की अच्छाईयों पर एक गहरा और अटूट भरोसा है। ये भरोसा उसकी अपनी बनाई…

एक औरत के मन तक ले जाती फिल्म

Film : A woman under influence कितनी फिल्में होंगी जो स्त्रियों के मनोविज्ञान में बहुत गहरे तक झांकने की कोशिश करती हैं। फिल्म जगत में…

अकेलापन समेटकर मुस्कराहट बिखेरती Amelie

एमिली अकेलेपन से जूझती एक लड़की है जो अपनी दुनिया को परी-कथाओं सा बनाकर अपने अकेलेपन का हल खोज रही है। एक सनकी से मां-बाप…

‘मैट्रो’की नयी भाषा सीखती एक मैट्रोसिटी

Mumbai Diary (23  Jun 2014) तकरीबन साड़े तीन महीने बाद मुम्बई लौटा हूं। दिल्ली की लू के बनिस्पत मुम्बई की ठन्डी हवाएं राहत देने वाली…

आपकी ज़िंदगी से बात करती एक फिल्म : ‘Her’

 फेसबुक पर एक दोस्त के स्टेटस को देखकर ये फिल्म डाउनलोड की और अब रात के दो बजकर 30 मिनट हो चुके हैं..वो फिल्म जो अभी…

‘एक सौ दर्द जले जब दिल में, एक नज़्म का जन्म हुआ’

गुलज़ार  साहब को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने की बधाई देते हुए मोहल्ला लाइव पर छपने वाली अपनी ‘मुंबई डायरी’ में से एक दिन जो…

आय हाय रे मिजाता

उत्तराखंड के लोक-गायक ‘हीरा सिंह राणा’ की गीतों के क्रम में एक और गीत ‘गुल्लक’ के ज़रिये आपको सुनाया जा रहा है.. ‘मिजाता’ नाम के…

‘उत्तराखंड आन्दोलन’का जनगीत ‘लस्का कमर बांधा’

पिछली पोस्ट में आपने सुना उत्तराखंड के  मशहूर जनकवि और गीतकार हीरा सिंह राणा का गाया  गीत ‘संध्या ‘. आज सुनिए उनका लिखा और गाया…

लड़के के लिए तबाह होती जिंदगियों का ‘किस्सा’

  पिछले मुंबई फिल्म फेस्टिवल में अनूप सिंह के निर्देशन में बनी फिल्म ‘किस्सा’ देखी थी.. उसी फिल्म पर की गई टिप्पणी को यहां पोस्ट…

एक ‘क्वीन’का आज़ाद होना

दिल्ली में कॉलेज आने जाने वाले लड़कों के बीच एक टर्म बहुत प्रचलित है। ‘बहन जी‘। ‘बहन जी टाइप‘ होना शहरी परिप्रेक्ष में एक लड़की…

शुरुआत ‘मासिक धर्म’की या गुलामी की ?

महिला दिवस का दिन। रात के तकरीबन दस बज रहे थे। दिल्ली के जेएनयू के माही मांडवी छात्रावास के लॉन में अभी-अभी पत्रकार प्रेक्षिस नाम…

पत्थर नहीं लगवाया तो प्रसाद नहीं दिया

(यह लेख गाँव कनेक्शन  के ४४ वें अंक में प्रकाशित हो चुका है.) अयोध्या के बारे में अब तक अर्जित मेरी सारी जानकारियों के स्रोत किताबी…

पुर्जों से बने शरीर के अंदर ‘कुछ और’तलाशती एक फिल्म : शिप ऑफ थीसियस

एक शहर के रुप में मुम्बई की आईरनी यही है कि उसकी बसावट में खुलेपन का अभाव है। पहली बार जब मैं मुम्बई आया था…
Documentary film by P Sainath

कहीं आप भी नीरो के मेहमान तो नहीं हैं

रोम में एक शासक हुआ करता था- नीरो। एक ऐसा शासक जिसके शासनकाल में लगी आग की लपटें आज तक इतिहास के पन्नों को झुलसाती…

जल्द ही गाँव पर फिल्म बनाउंगा : दीपक डोबरियाल

 मूलतः गाँव कनेक्शन के लिए लिए गए इस साक्षात्कार को यहां भी पढ़ा जा सकता है.  भारतीय सिनेमा में गाँव के किरदारों के बारे में…

आंखिरी लमहों में मुम्बई फिल्म फेस्टिवल

मुम्बई फिल्म फेस्टिवल  के छटे दिन फेसबुक पर फेस्टिवल के पेज से जानकारी मिली कि मुम्बई डाईमेन्शन कैटेगरी के अन्दर आने वाली 25 शौर्ट फिल्म्स का…

मुंबई फिल्म फेस्टिवल : पांचवा दिन

पिछले पांच दिनों से मुम्बई के पांच अलग अलग थियेटरों का पीछा किया है। हर थियेटर जैसे एक ट्रेन सा हो और फिल्म शुरु होने…

मुंबई फिल्म फेस्टिवल- चौथा दिन

एक और दिन मुम्बई फिल्म फेस्टिवल के नाम रहा। शुरुआत खराब थी। इतवार की सुबह सुबह सायान के सिनेमेक्स सिनेमाहौल में औडिटोरियम के बाहर 12…

मुम्बई फिल्म फेस्टिवल- दूसरा और तीसरा दिन

सुबह सुबह नीद खुली तो देर हो चुकी थी। साढ़े नौ बज चुके थे। रात को सोते वक्त सोचा था कि मुम्बर्इ फिल्म फेसिटवल के…

MAMI DIARY-1 : फिर आया मुंबई फिल्म फेस्टिवल

एक जलसा मुंबर्इ में दस्तक देने वाला है। इस जलसे की उत्सवधर्मिता का स्वरूप बिल्कुल अलहदा है। इस जलसे में जो होगा, वो स्क्रीन पर…

मैने दिल से कहा, ढूंढ़ लाना खुशी…

मैने दिल से कहा ढ़ूंढ़ लाना खुशी……कल मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक नीलेश मिस्रा के लिखे गीत की इन पंकितयों को सुनते हुए अचानक खयाल…

एक ईमानदारी से बोले गये झूठ की ‘कहानी’

कहानी के ट्रेलर देखकर लग रहा था कि कोई रोने धोने वाली फिल्म होगी… जिसमें शायद कलकत्ते को लेकर नौस्टेल्जिया जैसा कुछ होगा… शायद एक…

हमारे सिनेमा को जरुरत है पान सिंह तोमर जैसे बागियों की

बीहड़ में बागी होते हैं… डकैत मिलते हैं पार्लामेन्ट में….  पान सिंह तोमर का ये डायलौग फेसबुक की दीवारों पे बहुत दिनों से छाया हुआ…

नादान परिंदे घर आजा…..

कुछ दिन पहले भवन्स कौलेज में रौकस्टार के प्रोमोशन का लाईव शो देखते हुए कई सारे टैक्निकल एरर हुए तो कुछ शक सा हुआ। स्टेज…
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