By yatrakaar

85 Results

माजुली : सबसे बड़े नदी द्वीप का लाजवाब सफ़र

असम के माजुली को एशिया का सबसे बड़ा रिवर आइलैंड माना जाता है। पूर्वोत्तर भारत यह आईलैंड अपनी सत्र परम्परा […]

दमन में घूमने आएँ और अरब सागर के किनारे बसी पुर्तगाली विरासत देखें

पुराने क़िले, चर्च, समुद्री किनारे और शांत वातावरण, अगर आपको यह सब पसंद आता हो तो दमन आपके लिए घूमने […]

गीता श्री का नया यात्रा वृत्तांत, कुछ इधर ज़िंदगी कुछ उधर ज़िंदगी

  ट्रैवल बुक रिव्यू : कुछ इधर ज़िंदगी कुछ उधर ज़िंदगी, गीता श्री समीक्षक : कुमार सुशांत   कुछ महीने […]

शिवपुरी, प्राकृतिक नज़ारों से सराबोर एक अनूठी सैरगाह

मध्य प्रदेश का शिवपुरी देश की उन प्राचीनतम जगहों में से है जो अपनी प्राकृतिक ख़ूबसूरती और वन्यजीवन के लिए […]

दूर दुर्गम दुरुस्त : लॉकडाउन की क़ैद में हवा के झौंके सी किताब 

पाठकीय समीक्षा : दूर दुर्गम दुरुस्त  संयोग बड़े मजेदार होते है, सच में. आठ-दस दिन में दूसरी बार ये एहसास […]

जयपुर के हवामहल की यात्रा : जयपुर यात्रा भाग-4

राजस्थान के जयपुर शहर की यात्रा में हर घुमक्कड़ के अपने अलग अनुभव होते हैं। ऐसी ही घुमक्कड़ तुलिका पांडेय […]

लपक के छूना हिमालय को : ब्रह्मताल ट्रेकिंग भाग-2

विनीता यशस्वी नैनीताल से हैं. खूब घुमक्कड़ी करती हैं और देखे गए नज़ारों को शानदार तस्वीरें में भी उकेरती हैं. […]

लपक के छूना हिमालय को : ब्रह्मताल ट्रेकिंग भाग-1

उत्तराखंड के ब्रह्मताल ट्रेकिंग (Brahmtal trek) के अपने रोमांचक अनुभव को हमें लिख भेजा है विनीता यशस्वी ने. विनीता यशस्वी […]

जयपुर में जयगढ़, आमेर का क़िला और जल महल : जयपुर यात्रा भाग-3

राजस्थान के जयपुर शहर की यात्रा में हर घुमक्कड़ के अपने अलग अनुभव होते हैं। ऐसी ही घुमक्कड़ तुलिका पांडेय […]

जयपुर के सिटी पैलेस की यात्रा : जयपुर यात्रा भाग-2

राजस्थान के जयपुर शहर की यात्रा में हर घुमक्कड़ के अपने अलग अनुभव होते हैं। ऐसी ही घुमक्कड़ तुलिका पांडेय […]

जयपुर के नाहरगढ़ क़िले की यात्रा : जयपुर यात्रा भाग-1

राजस्थान के जयपुर शहर की यात्रा में हर घुमक्कड़ के अपने अलग अनुभव होते हैं। ऐसी ही घुमक्कड़ तुलिका पांडेय […]

‘सियाहत’ की रवायत को आगे बढ़ाती किताब

भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से दिए जाने वाले ‘नवलेखन पुरस्कार’ (2017) से सम्मानित आलोक रंजन की किताब दक्षिण भारत की […]

दार्जिलिंग मेरे बचपन का स्विट्ज़रलैंड है : भाग-3

प्रतीक्षा रम्या कोलकाता में रहती हैं. पत्रकारिता की छात्रा रही हैं. उन्होंने कोलकाता से दार्जिलिंग की अपनी यात्रा की कहानी […]

नया यात्रा वृत्तांत- नास्तिकों के देश में: नीदरलैंड

प्रवीण झा नॉर्वे (यूरोप) में रहते हैं. हिन्दी लेखन में लगातार सक्रिय हैं. पेशे से डॉक्टर हैं और मन से […]

दार्जिलिंग मेरे बचपन का स्विट्ज़रलैंड है : भाग-2

प्रतीक्षा रम्या कोलकाता में रहती हैं. पत्रकारिता की छात्रा रही हैं. उन्होंने कोलकाता से दार्जिलिंग की अपनी यात्रा की कहानी […]

दार्जिलिंग मेरे बचपन का स्विट्ज़रलैंड है : भाग-1

प्रतीक्षा रम्या कोलकाता में रहती हैं. पत्रकारिता की छात्रा रही हैं. उन्होंने कोलकाता से दार्जिलिंग की अपनी यात्रा की कहानी […]

किलों और महलों का शहर है प्राग

तृप्ति शुक्ला मीडिया से जुड़ी हैं. अक्सर मुस्कुराती हुई नज़र आती हैं. फ़ेसबुक पर अपने ‘क्वर्की वन लाइनर्स’ के लिए […]

सर्द हवाओं में लिपटा अटलांटिक का किनारा

अपूर्वा अग्रवाल आईआईएमसी से पढ़ी हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया और बिज़नेस स्टैंडर्ड में  पत्रकार रह चुकी हैं. फ़िलहाल जर्मनी में […]

रात में जादुई नगरी लगने लगता है बुडापेस्ट

तृप्ति शुक्ला मीडिया से जुड़ी हैं. अक्सर मुस्कुराती हुई नज़र आती हैं. फ़ेसबुक पर अपने ‘क्वर्की वन लाइनर्स’ के लिए […]

पोलैंड की वो राजधानी, जहां लोग ख़्वाब जी रहे थे

तृप्ति शुक्ला मीडिया से जुड़ी हैं. अक्सर मुस्कुराती हुई नज़र आती हैं. फ़ेसबुक पर अपने ‘क्वर्की वन लाइनर्स’ के लिए […]

ऐसे होता था भारत और तिब्बत के बीच व्यापार

सुशील बहुगुणा वरिष्ठ पत्रकार हैं और एनडी टीवी से जुड़े हैं. खासतौर पर पर्यावरण से जुड़े विषयों पर उन्होंने कई […]

प्रेम की एक कहानी है ‘गोरंग देस से गंगोत्री’

किशोर चंद्र पाटनी, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में गोरंगचौड़ नाम की जगह पर राजनीति विज्ञान के प्रवक्ता हैं. उनकी एक […]

जर्मनी पर मनोहर श्याम जोशी की उड़ती नजर

मनोहर श्याम जोशी हिंदी में एक अलग तरह की क़िस्सागोई के लिए जाने जाते हैं। ख़ास चुटीला अन्दाज़ और उसमें व्यंग्य का अनूठा […]

कहानी उस ‘देस’ की जहाँ समय स्थिर है और आदमी खर्च हो रहा है

बुक रिव्यू : वह बह कोई देस है महाराज, अनिल कुमार यादव  समीक्षक : अविनाश मिश्र    अनिल कुमार यादव […]

ब्रेख्त और एक उदास नगर

हिंदी यात्रा-लेखन की परम्परा में निर्मल वर्मा एक बड़ी अहम कड़ी हैं। आज यात्राकार पर पढ़िए उनके यात्रा वृत्तांत ‘चीडों […]

मोहन राकेश और एक आख़री चट्टान

मोहन राकेश : वांडर लस्ट खुला समुद्र-तट। दूर-दूर तक फैली रेत। रेत में से उभरी बड़ी-बड़ी स्याह चट्टानें। पीछे की […]

निर्मल वर्मा की प्रयाग यात्रा और कुंभ मेले का मार्मिक यात्रा वृत्तांत

निर्मल वर्मा के यात्रा वृत्तांत इतने मार्मिक होते हैं कि लगता है आप किसी गहरे दार्शनिक समंदर में गोते लगा […]

मोरक्कन घुमक्कड़ इब्न बतूता की भारत यात्रा

मोरक्कन यात्री इब्नबतूता का जन्म 24 फरवरी 1304 ई. को हुआ था। इनका पूरा नाम अबू अब्दुल्ला मुहम्मद था। इब्बनबतूता […]

अज्ञेय ने देखी एक बूँद जो सहसा उछली

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय : घुम्मकड़ी एक प्रवृत्ति ही नहीं, एक कला भी है। देशाटन करते हुए नये देशों में […]

‘हंसा’ :गांव में शहर की गुपचुप घुसपैठ

हंसा। थियेटर और सिनेमा के अदाकार मानव कौल ने जब इस फिल्म को अपनी फेसबुक टाइमलाइन पे शेयर किया तो […]

दस्तूरी समाज में कस्तूरी की तलाश : मसान

वो कहती है- “तुम बहुत सीधे और ईमानदार हो। बिल्कुल निदा फाज़ली की गज़लों की तरह।” वो पूछता है – […]

राजस्थान में है शादी से पहले ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ करने की ये कुप्रथा

सेक्रेड ग्लास बाउल प्रिया थुवत्सरी की एक डॉक्युमेंट्री फ़िल्म है जो राजस्थान में शादी से पहले ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ करने कुप्रथा […]

‘ओल्ड स्कूल’ होकर भी ‘घणी बांवरी’ सी फिल्म

एक शक्ल की दो लड़कियां हैं जिनमें एक ओरिजनल है एक डुब्लिेकेट। अब असल मुद्दा ये है कि जो आॅरिजनल […]

ये ‘निर्णय’ आखिर किसका है ?

पुष्पा रावत कैमरा लेकर निकलती है निम्न मध्यवर्गीय परिवार की युवा लड़कियों की उन इच्छाओं की खोज में जिन्हें रोजमर्रा […]

महत्वाकांक्षाओं का ‘आप’निवेशिक काल

ये राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का ‘आप’निवेशिक काल था. वो धारा जो न दक्षिणपंथी लगती थी, न वामपंथी अब वो ‘कमीनपंथी’ पर […]

हत्याओं के प्रतिशोध से गुजरता हाइवे

एन एच 10 के एक दृश्य में मीरा (अनुष्का शर्मा) हाइवे के किसी ढाबे के गंदे से टॉयलेट के दरवाज़े […]

कसेट वाले ज़माने में मोह के धागे

बाज़ार के सामने बार-बार हारता बाॅलिवुड जब दम लगाता है तो दम लगाके हाइशा सरीखा कुछ सम्भव हो पाता है। […]

पीके एकदम ‘लुल’नहीं है

चलिये शुरु से शुरु करते हैं। पीके इसी भाव से शुरु होती है। एकदम नग्न। आवरणहीन। इस विशाल दुनिया के […]

वक्त की उंगलियों में नाचती है ज़िंदगी की कठपुतली

रात का तकरीबन नौ बज रहा था। संगीत नाटक अकादमी से बाहर निकला ही था कि मेनरोड पर एक रिक्शेवाले […]

मैगी बनाने में १० मिनट पर सेक्स ‘टू मिनट नूडल्स’की तरह क्यूं ?

Lucknow Diary सेक्स सोसाईटी एन्ड शी…. लखनऊ में इस नाम से कोई थियेटर शो है, पहले तो ये जानकर ही […]

आँखें खोलने की नसीहत देती ‘आँखों देखी’

दो समानान्तर रेखाएं अनन्त पर मिलती हैं। बाउजी इस बात को मानने से इनकार देते हैं। दो समानान्तर रेखाएं अगर […]

एक औरत के मन तक ले जाती फिल्म

Film : A woman under influence कितनी फिल्में होंगी जो स्त्रियों के मनोविज्ञान में बहुत गहरे तक झांकने की कोशिश […]

अकेलापन समेटकर मुस्कराहट बिखेरती Amelie

एमिली अकेलेपन से जूझती एक लड़की है जो अपनी दुनिया को परी-कथाओं सा बनाकर अपने अकेलेपन का हल खोज रही […]

आपकी ज़िंदगी से बात करती एक फिल्म : ‘Her’

 फेसबुक पर एक दोस्त के स्टेटस को देखकर ये फिल्म डाउनलोड की और अब रात के दो बजकर 30 मिनट हो […]

आय हाय रे मिजाता

उत्तराखंड के लोक-गायक ‘हीरा सिंह राणा’ की गीतों के क्रम में एक और गीत ‘गुल्लक’ के ज़रिये आपको सुनाया जा […]

लड़के के लिए तबाह होती जिंदगियों का ‘किस्सा’

  पिछले मुंबई फिल्म फेस्टिवल में अनूप सिंह के निर्देशन में बनी फिल्म ‘किस्सा’ देखी थी.. उसी फिल्म पर की […]

एक ‘क्वीन’का आज़ाद होना

दिल्ली में कॉलेज आने जाने वाले लड़कों के बीच एक टर्म बहुत प्रचलित है। ‘बहन जी‘। ‘बहन जी टाइप‘ होना […]

‘एक सौ दर्द जले जब दिल में, एक नज़्म का जन्म हुआ’

Mumbai Diary : 17 (December 2013) गुलज़ार  साहब को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने की बधाई देते हुए मोहल्ला लाइव […]

पत्थर नहीं लगवाया तो प्रसाद नहीं दिया

(यह लेख गाँव कनेक्शन  के  44वें अंक में प्रकाशित हो चुका है.) अयोध्या के बारे में अब तक अर्जित मेरी सारी […]

शिप ऑफ थीसियस : पुर्जों से बने शरीर के अंदर कुछ और तलाशती एक फिल्म

शिप ऑफ थीसियस फ़िल्म देखी तो सोचा कि एक शहर के रुप में मुम्बई की आईरनी यही है कि उसकी […]

कहीं आप भी नीरो के मेहमान तो नहीं हैं

रोम में एक शासक हुआ करता था- नीरो। एक ऐसा शासक जिसके शासनकाल में लगी आग की लपटें आज तक […]

जल्द ही गाँव पर फिल्म बनाउंगा : दीपक डोबरियाल

 मूलतः गाँव कनेक्शन के लिए लिए गए इस साक्षात्कार को यहां भी पढ़ा जा सकता है.  भारतीय सिनेमा में गाँव […]

आंखिरी लमहों में मुम्बई फिल्म फेस्टिवल

मुम्बई फिल्म फेस्टिवल के छटे दिन फेसबुक पर फेस्टिवल के पेज से जानकारी मिली कि मुम्बई डाईमेन्शन कैटेगरी के अन्दर आने […]

मुंबई फिल्म फेस्टिवल : पांचवा दिन

 पांच दिनों से मुम्बई के पांच अलग अलग थियेटरों का पीछा किया है। हर थियेटर जैसे एक ट्रेन सा हो […]

मुंबई फिल्म फेस्टिवल- चौथा दिन

एक और दिन मुम्बई फिल्म फेस्टिवल के नाम रहा। शुरुआत खराब थी। इतवार की सुबह सुबह सायान के सिनेमेक्स सिनेमाहौल […]

मुम्बई फिल्म फेस्टिवल- दूसरा और तीसरा दिन

सुबह सुबह नीद खुली तो देर हो चुकी थी। साढ़े नौ बज चुके थे। रात को सोते वक्त सोचा था […]

MAMI DIARY-1 : फिर आया मुंबई फिल्म फेस्टिवल

एक जलसा मुम्बई में दस्तक देने वाला है। इस जलसे की उत्सवधर्मिता का स्वरूप बिल्कुल अलहदा है। इस जलसे में […]

एक ईमानदारी से बोले गये झूठ की ‘कहानी’

कहानी के ट्रेलर देखकर लग रहा था कि कोई रोने धोने वाली फिल्म होगी… जिसमें शायद कलकत्ते को लेकर नौस्टेल्जिया […]

हमारे सिनेमा को जरुरत है पान सिंह तोमर जैसे बागियों की

बीहड़ में बागी होते हैं… डकैत मिलते हैं पार्लामेन्ट में….  पान सिंह तोमर का ये डायलौग फेसबुक की दीवारों पे […]

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