बाद बारिश के

फूल चादर की तरह लाल मिट्टी वाली उस कच्ची सड़क पर बिछे थे। रेंगती हुई चींटियां खुश थी कि बारिश के बाद ही सही उन्हें नयी सलवटें नसीब हुई. गिलहरियां … Read More

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सुबह की सैर जैसे सपना हो गई हो

बाद बारिश के सुबह की सैर जैसे रात का सपना हो गई थी.. ज़मीन अभी भी नम थी.. जैसे कभी कभी उसकी आंखें हो जाया करती हैं उसकी याद में.. … Read More

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राहे सुकून है संजय वन

उस जंगल की परिधि से लगी छोटी-बड़ी इमारतें ऐसी लग रही थी जैसे किसी शांत सी झील को कंटीले तार-बाढ़ से घेर दिया गया हो. जैसे पूरा शहर धीरे धीरे … Read More

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चुनावी दिल्ली में एक बीमार सा दिन

 सीने में इन दिनों कभी कभी तेज़ दर्द होता है.. लगता है की पेट के अन्दर कोई जा बैठा है जो कभी कभी फेफड़ों को जोर से पकड़ लेता है और निचोड़ने … Read More

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जेएनयू की होली – 5 अनुभव

तो इस बार की होली जेएनयू में खेली। बाबा गंगनाथ मार्ग से जेएनयू के गेट की तरफ बड़ते ही माहौल एकदम बदल सा जाता है। जेएनयू कैम्पस के भीतर रंग … Read More

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इनक्रोचमेंट, डिमोल्यूशन एंड डिस्प्लेसमेंट

सुबह सुबह नौएडा मोड़ से गुजरते हुए सड़क के किनारे देखा तो वहां मां दुर्गा की वो मूर्ति नहीं थी, ना ही नटराज की। वहां कुछ लोग थे जो बुल्डोजर … Read More

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एक दोस्त का प्रोफेश्नल हो जाना

कई बार अपने आसपास लोगों को निहायत प्रोफेश्नल होता देख डर लगता है। समझ नहीं आता कि क्या ज्यादा जरुरी है। इन्सानी भावनाओं को जिन्दा रखते हुए जीना या प्रोफेश्नल … Read More

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क्या आपका फोन चोरी नही हुआ

अरे यार फोन चोरी हो गया। घर आकर बताया तो भाई लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट तैर आई। पहली बार जब घर आकर बताया था तो ऐसा नहीं हुआ था। … Read More

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और तीन की टिकट नहीं रही…….

दिल्ली की बसों में एक और बड़ा दर्दनाक वाकया हुआ। बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि इस हादसे में 3 रुपये की टिकट नहीं रही । दिल्ली … Read More

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भीड़ भरी बस और वो

दिल्ली की भीड़ भरी बसों में रोज कई वाकये होते हैं। मसलन मोबाईल या पर्स चोरी हो जाना। पर इन वाकयों को अंजाम देने वाले लोग ये काम चोरी छिपे … Read More

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एक और भड़ास जैसा कुछ

हम एक ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जी रहे हैं जहां पे आपको बोलने सुनने और यहां तक कि सोचने के लिए भी एक दायरा तय कर लेना होता है। क्या … Read More

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होली है तो पर यहां कहां

कल होली है तो पर होने जैसा कुछ नजर नहीं आया अब तक। हर त्यौहार की तरह इस होली में फिर घर की याद हो आयी है। घर जाने का … Read More

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यमुना किनारे विचरने के बहाने

[dropcap]न[/dropcap]दियां हमेशा उस जगह को एक संस्कृति देती हैं जहां वो बह रही होती हैं। नदियों के साथ एक पूरा जीवन और उस जीवन के बरक्स लोगों की दैनिक जीवनचर्या … Read More

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समय का कैक्टस और कमल का फूल

कई बार ना जाने क्यों लगता है कि इस शहर में एक बंजर सी उदासी भरी पडी है। और जब जब ये लगता है तो महसूस होता है कि मैं … Read More

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