सफ़र जारी रखें

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  1. दोस्त उमेश पढ़ तो तुम्हारे ब्लॉग को पिछले दिनों से रहा हूँ पर कमेन्ट नही करने दिया इस कमबख्त ब्लॉग ने ,खैर खुश हूँ दो बातों को लेकर कि आज कमेन्ट कर प् रहा हूँ , दूसरा तुम्हारी पोस्ट को लेकर ,”मज़हब नही सिखाता आपस में बैर करना ” पर ये हमारे देश की विडंबना ही है कि हमने मज़हबी दीवार बहुत ऊंची बना रखी है हमारे समाज में |

    ईद मुबारक

    विकास ज़ुत्शी
    http://www.likhoapnavicha.blogspot.com

  2. ईद पर मै भी जाती हूँ.रोजा इफ्तार भी किया . अच्छा लगता है. सोचती हूँ.होली मिलन कब किसी चमन मिया के द्वारा होगा ? यदि ऐसा होने लगे तो ….?

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