सफ़र जारी रखें

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  1. इस कहानी में उमेश ने दिल्ली में जीवन एक पहलु को समझा है और रोज़ सुबह मिडिल क्लास भीड़ से एक दुसरे पर होने वाले अत्याचार को उनकी मजबूरियों से जोड़ा है, जो बहुत हद सही है. यह भी सही है कि उस भीड़ में हर माथे पर केवल शिकन और एक तरह का भय रहता ही है, और ये इस शहर की नियति बन चुका है कि यहाँ का जनमानस अपना सारा दिन इस कड़वाहट के साथ ही बिताये. हालाँकि मैं ये भी सोचता हूँ कि हम कोशिश करें तो हर शख्श में एक सुन्दर, आकर्षक और मोहिनी छवि देख सकते हैं. उनमें सम्मान और प्रेम की मीठी मिश्री घोली जा सकती है, पर अभी यह मुश्किल है शायद इसीलिए उमेश को भी अंत में अपना लेट होना, दफ्तर का प्रेशर और जीवन कि तमाम आपाधपियाँ याद आ गयीं.
    उमेश, मुझे यकीन है उस वाकये ने तुम्हारे उस पूरे दिन को ज़रूर कुछ आसान और खूबसूरत बना दिया होगा!
    मैं उम्मीद करता हूँ कि हर यात्री के थकान भरे जीवन में ऐसे पल आयें और चैन से उसका और उसकी वजह से सबका दिन मीठा गुज़रे…

    आज तुम सोभाग्यशाली थे, तो तुम्हे मुबारक

  2. इस कहानी में उमेश ने दिल्ली में जीवन एक पहलु को समझा है और रोज़ सुबह मिडिल क्लास भीड़ से एक दुसरे पर होने वाले अत्याचार को उनकी मजबूरियों से जोड़ा है, जो बहुत हद सही है. यह भी सही है कि उस भीड़ में हर माथे पर केवल शिकन और एक तरह का भय रहता ही है, और ये इस शहर की नियति बन चुका है कि यहाँ का जनमानस अपना सारा दिन इस कड़वाहट के साथ ही बिताये. हालाँकि मैं ये भी सोचता हूँ कि हम कोशिश करें तो हर शख्श में एक सुन्दर, आकर्षक और मोहिनी छवि देख सकते हैं. उनमें सम्मान और प्रेम की मीठी मिश्री घोली जा सकती है, पर अभी यह मुश्किल है शायद इसीलिए उमेश को भी अंत में अपना लेट होना, दफ्तर का प्रेशर और जीवन कि तमाम आपाधपियाँ याद आ गयीं.
    उमेश, मुझे यकीन है उस वाकये ने तुम्हारे उस पूरे दिन को ज़रूर कुछ आसान और खूबसूरत बना दिया होगा!
    मैं उम्मीद करता हूँ कि हर यात्री के थकान भरे जीवन में ऐसे पल आयें और चैन से उसका और उसकी वजह से सबका दिन मीठा गुज़रे…

    आज तुम सोभाग्यशाली थे, तो तुम्हे मुबारक

  3. इस कहानी में उमेश ने दिल्ली में जीवन एक पहलु को समझा है और रोज़ सुबह मिडिल क्लास भीड़ से एक दुसरे पर होने वाले अत्याचार को उनकी मजबूरियों से जोड़ा है, जो बहुत हद सही है. यह भी सही है कि उस भीड़ में हर माथे पर केवल शिकन और एक तरह का भय रहता ही है, और ये इस शहर की नियति बन चुका है कि यहाँ का जनमानस अपना सारा दिन इस कड़वाहट के साथ ही बिताये. हालाँकि मैं ये भी सोचता हूँ कि हम कोशिश करें तो हर शख्श में एक सुन्दर, आकर्षक और मोहिनी छवि देख सकते हैं. उनमें सम्मान और प्रेम की मीठी मिश्री घोली जा सकती है, पर अभी यह मुश्किल है शायद इसीलिए उमेश को भी अंत में अपना लेट होना, दफ्तर का प्रेशर और जीवन कि तमाम आपाधपियाँ याद आ गयीं.
    उमेश, मुझे यकीन है उस वाकये ने तुम्हारे उस पूरे दिन को ज़रूर कुछ आसान और खूबसूरत बना दिया होगा!
    मैं उम्मीद करता हूँ कि हर यात्री के थकान भरे जीवन में ऐसे पल आयें और चैन से उसका और उसकी वजह से सबका दिन मीठा गुज़रे…

    आज तुम सोभाग्यशाली थे, तो तुम्हे मुबारक

  4. इस कहानी में उमेश ने दिल्ली में जीवन एक पहलु को समझा है और रोज़ सुबह मिडिल क्लास भीड़ से एक दुसरे पर होने वाले अत्याचार को उनकी मजबूरियों से जोड़ा है, जो बहुत हद सही है. यह भी सही है कि उस भीड़ में हर माथे पर केवल शिकन और एक तरह का भय रहता ही है, और ये इस शहर की नियति बन चुका है कि यहाँ का जनमानस अपना सारा दिन इस कड़वाहट के साथ ही बिताये. हालाँकि मैं ये भी सोचता हूँ कि हम कोशिश करें तो हर शख्श में एक सुन्दर, आकर्षक और मोहिनी छवि देख सकते हैं. उनमें सम्मान और प्रेम की मीठी मिश्री घोली जा सकती है, पर अभी यह मुश्किल है शायद इसीलिए उमेश को भी अंत में अपना लेट होना, दफ्तर का प्रेशर और जीवन कि तमाम आपाधपियाँ याद आ गयीं.
    उमेश, मुझे यकीन है उस वाकये ने तुम्हारे उस पूरे दिन को ज़रूर कुछ आसान और खूबसूरत बना दिया होगा!
    मैं उम्मीद करता हूँ कि हर यात्री के थकान भरे जीवन में ऐसे पल आयें और चैन से उसका और उसकी वजह से सबका दिन मीठा गुज़रे…

    आज तुम सोभाग्यशाली थे, तो तुम्हे मुबारक

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