साहित्य आज तक 2019 में घुमक्कड़ी पर चर्चा

साहित्य आजतक 2019 में ‘एवरेस्ट से भी ऊंचा’ नाम से सेशन हुआ जिसमें उमेश पंत ने भी अपनी बातें रखी. उन बातों का लब्बोलुबाब ‘आजतक’ की वेबसाइट पर छपी इस रिपोर्ट में दिया गया है.

पूरी बातचीत का वीडियो यह रहा.   

‘आजतक’ की रिपोर्ट से एक अंश. पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें 

साहित्यकारों के महाकुंभ साहित्य आजतक के तीसरे और अंतिम दिन असगर वजाहत जैसी शख्सियत ने मंच की शोभा बढ़ाई, तो वहीं ट्रैवल राइटिंग के जरिए पर्यटन को नया आयाम दे रहे घुमक्कड़पंथी युवा रचनाकारों ने भी. एवरेस्ट से भी ऊंचा सेशन में ट्रैवल ब्लॉगर नीरज मुसाफिर और लेखक उमेश पंत ने अपने अनुभव साझा किए.

यात्रा के लिए इनरलाइन पास जरूरी

ट्रैवल राइटर उमेश पंत ने 18 दिन लंबी आदि कैलाश यात्रा को अपने जीवन की सबसे यादगार यात्रा बताते हुए कहा कि लौटते समय जंगल में फंस गए, बारिश हो रही थी, टेम्परेचर माइनस में जा रहा था और हमारे पास न खाने को कुछ था न अलाव. मन में यह सवाल भी उठने लगे थे कि क्या हम जिंदा रह पाएंगे. पंत ने कहा कि एक पगडंडी थी, जिसे नदी काट रही थी, एक पहाड़ बहने लगा था.

उन्होंने यात्रा की पृष्ठभूमि की चर्चा करते हुए कहा कि उत्तराखंड से होने के कारण पहाड़ की वैल्यू नहीं समझते थे. मुंबई से दिल्ली आना पड़ा. मन खराब था, दोस्त ने फोन कर पूछा कि आदि कैलाश चलें. फितूरी मन का फैसला था, अचानक प्लान बना और दोस्त के साथ चल दिए. उन्होंने कहा कि इसके बाद नागालैंड के जुकोवली में भी काफी ठंड थी, लेकिन यह भरोसा था कि सर्वाइव कर लेंगे. उन्होंने अपनी पुस्तक इनरलाइन पास का उल्लेख करते हुए कहा कि एक इनरलाइन परमिट वह होता है, जो कुछ क्षेत्रों में जाने के लिए सरकार जारी करती है, लेकिन यात्रा के लिए एक इनरलाइन परमिट हमें अपने अंदर से भी लेने की जरूरत होती है.

मजबूत बनाता है दुर्गम भूगोल

उमेश पंत ने कहा कि यात्राएं संवेदनशील बनाती हैं. नया भूगोल अजनबी शख्स की तरह होता है. दुर्गम भूगोल व्यक्ति को मजबूत बनाता है. उन्होंने यात्रा पर ऐसे ही निकल जाने को बेवकूफी बताते हुए सलाह दी कि कहीं भी जाने से पहले उस स्थान के भूगोल को जान लें. टेंट और खाने का सामान ले लें. कुछ लोगों को जरूर बता दें कि कहां जा रहे हैं, जिससे किसी अप्रिय स्थिति में आपकी तलाश की जा सके.

पंत ने 2013 के उत्तराखंड हादसे के लिए भी इन लापरवाहियों को जिम्मेदार बताते हुए सरकार को भी सलाह दी कि ऐसे स्थानों पर जाने वालों के रजिस्ट्रेशन कराए जाने चाहिए, जिससे उन्हें ढूंढ़ने में आसानी हो. उन्होंने कहा कि किसी भी नई जगह जाएं तो ओपन माइंडेड होकर जाएं. पूर्वोत्तर को लेकर पंत ने कहा कि यहां का भूगोल रोचक है. नागालैंड में ही 17 से अधिक ट्राइब हैं, जिनकी अपनी भाषा है. यहां 9 बजे रात में भी महिलाएं बस में अकेले सुरक्षित सफर करती हैं. अनुशासन भी बहुत है.

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