गणपति के बाद फिल्मों का उत्सव

Mumbai Diary : 11 (October 2012)

गणपति बप्पा ने अलविदा कह दिया है। गणेश के इस बड़े उत्सव को देखकर लगता है कि मुम्बई में लोग मस्त रहना जानते हैं। गणेश उत्सव के तुरन्त बाद ही निर्देशक उमेश शुक्ला की फिल्म ओह माई गौड देखते हुए अभी अभी बीते गणपति उत्सव के जलसे के दृश्य जैसे रिवाईन्ड होते हैं। कांजुरमार्ग से अंधेरी जाते हुए पहले पवई लेक, फिर जुहू बीच, फिर वर्सोवा बीच की तरफ न जाने कितने हज़ारों लोगों की जमात गणपति को दरिया में डुबा देने पर आमादा दिखती है। लोगों के अपने अपने गणेश एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते नज़र आते हैं। ट्रको में बड़े बड़े गणपति लादे लोग, ठेलों पर अपने छोटे छोटे गणपति ले जाते लोगों को हिकारत से देखते नज़र आते हैं और ठेलों के इर्द गिर्द अपने छोटू गणपति को ले जाती जनता की आंखों में हीनभावना नज़र आती है। सड़कों पे बेतहाशा भीड़ नज़र आती है, ट्रेफिक ज़ाम नज़र आता है। डीजे पर बजते चिकनी चमेली सरीखे आईटम नम्बरर्स पर सड़कों पर थिरकते पिये अनपिये औरतों और मर्दों का नाच नज़र आता है और अन्त में समन्दर के किनारे गणपति के जलसे के बाद फैली गंदगी नज़र आती है। गंदगी जो समन्दर की लहरों और आस पास बहती हवा में लम्बे समय के लिये घुल जाती है। समझ नहीं आता कि क्या गणपति अगले बरस फिर ऐसी गंदगी में आना पसंद करेंगे। पर फिर समझ आता है कि वो आएंगे ज़रुर, मूर्तियों का वो बाज़ार उन्हें ज़रुर वापस खींच लायेगा। ये बाज़ार के पैदा किये हुए गणपति हैं, बाज़ार से आंखिर कितने वक्त तक दूर रह सकते हैं।

पर मुंबई की सड़कों पर दिखने वाले इन जलसों की अच्छी बात ये है की यहाँ महिलाओं के लिए भी उतना ही स्पेस है जितना पुरुषों के लिए.. जितनी मस्ती से सड़कों पर पुरुष नाचते नज़र आते हैं, महिलाएं भी उतनी ही उमंग से थिरकती हुई दिख जाती हैं..  यूं भी त्योहारों की खुशी  किसी वर्ग विशेष तक सिमट कर रह जाए  ये सही भी नहीं है. मुंबई के लोग उत्सवों का आनंद लेना जानते हैं, और कम से कम इसी बहाने से सही मिलने-जुलने की संस्कृति मुंबई के मूल निवासियों में बची तो हुई है.

खैर इस पूंजी केन्द्रित कम आध्यात्मिक जलसे के बाद अब एक दूसरा जलसा मुम्बई में दस्तक देने वाला है। इस जलसे की उत्सवधर्मिता का स्वरुप बिल्कुल अलहदा है। इस जलसे में जो होगा वो स्क्रीन पर होगा और उसका असर लोगों के दिलों, दिमागों और शायद मानसिकताओं पर होगा। सिनेमा को पालते पोसते इस शहर में सिनेमा के इस उत्सव को लेकर कितना उत्साह है ये कल से पूरे एक हफते देखने को मिलेगा।

मामी मुम्बई के रास्ते पर है। बस कल ही हम तक पहुंच जाएगा। इस बार मिस नहीं करना है। मन बना लिया है। पिछली बार अंधेरी में रहते हुए भी, वाकिंग डिस्टेंस पर होते हुए भी न जाने क्यों एक भी फिल्म नहीं देखी। जीविका फिल्म फेस्टिवल और ओशियान्स को मोहल्ला लाईव और दैनिक भास्कर के लिये कवर किया था कभी। अखबारों की कटिंग्स और वैब्साईटस के लिंक्स ने अपना काम बखूबी किया था। मामी का प्रेस कार्ड इन्फिनिटी से लगे सिनेमैक्स के किसी डैस्क में मेरा इन्तज़ार करता रहा। मुफत में सैकड़ों फिल्में देखने के उस अनुभव को यूं ही फिजूल जाने दिया था पिछली बार। बेवकूफी की भी एक हद होती है, नहीं?

इस बार फिर मौका मिला है। कांजुरमार्ग से सीएसटी तक सीधी टेन जाती है। सीएसटी के पास ही एनसीपीए और आईनौक्स इस बार के मेन वैन्यू में शामिल हैं।

कुछ दिनों पहले मामी के प्रेस कौन्फ्रेंस में श्याम बेनेगल और सुधीर मिस्रा को सुना। उन्होंने बताया था कि इस बार इन्डियन गोल्ड कम्पीटिशन के तहत भारतीय भाषाओं में बनी अलग अलग डेब्यू डाईरेक्टर्स की तेरह फिल्में दिखाई जाएंगी। आप अगर फ्रेंच सिनेमा में रुचि रखते हैं तो खुश हो जाईये। कुछ खास फ्रेंच फिल्में आपके लिये मामी में आपका इन्तज़ार कर रही हैं। इटैलियन सिनेमा के इतिहास की झलकियां दिखाती कुछ फिल्में भी स्क्रीन की जाएंगी। अगर हमारे देश में फिल्म कल्चर के शुरुआती दौर की बनी बेआवाज़ फिल्मों का लुत्फ लाईव आर्केस्टा के साथ उठाना चाहते हों तो भी आप मामी के दरवाजे पे दस्तक दे सकते हैं।

इस बार रिलाईंस इन्टरटेनमेंट और अमेरिकन एक्सप्रेस साझे तौर पर मुम्बई फिल्म फेस्टिवल को प्रायोजित कर रहे हैं, इस फेस्टिवल का आयोजक हर बार की तरह मुम्बई एकेडमी औफ मूविंग इमेज यानी मामी हैं। यहां बहाने से बता दें कि मामी की स्थापना 1997 में मशहूर फिल्म निर्देशक रिषिकेश मुखर्जी ने की थी और फिलवक्त जाने माने फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल इसे संचालित कर रहे हैं। यश चोपड़ा, सुधीर मिस्रा, अनुराग कश्यप, शबाना आज़मी, जया बच्चन, अमोल पालेकर और फरहान अख्तर मामी के बोर्ड के अन्स्यों में शामिल हैं।

कल यानि 18 अक्टूबर से शुरु होकर 25 तारीख तक चलने वाले इस फेस्टिवल में देश विदेश के 200 से अधिक बेहतरीन फिल्मों की स्क्रीनिंग की जानी है। 18 तारीख की शाम 7 बजे मशहूर अभिनेत्री श्री देवी जिन्होंने लम्बे वक्त बाद इंग्लिश विंग्लिश से बौलिवुड में वापसी की है, फेस्टिवल का उदघाटन करेंगी। 19 तारीख से सुबह सुबह 10 बजे पहली फिल्म स्क्रीन्स पर लग जाएगी और आंखिरी फिल्म रात के साढ़े आठ बजे शुरु होगी। फेस्टिवल में शामिल होना चाहते हैं तो आपको रजिस्टेशन कराना होगा। जिसका शुल्क आप मामी की वैबसाईट पर देख सकते हैं। लम्बी कतारों को रोकने के लिये इस बार डैलीगेट पास के साथ साथ हर फिल्म के लिये अलग अलग पास की व्यवस्था होनी थी और औनलाईन प्रीबुकिंग की सुविधा भी दी जा रही थी। इस बाबत मामी की ओर से एक ईमेल भेजा गया था पर फिर एक और ईमेल भेजकर बताया गया कि उस ईमेल को इग्नोर कर दिया जाये। थोड़ा सा कन्फयूजन है जो कल क्लियर हो जाएगा।

दिल्ली के ओशियान्स में देखी गई कई फिल्मों की छाप अब भी ज़ेहन में बिल्कुल ताज़ा ताज़ा सी है। इस फिल्म फेस्टिवल से भी कुछ ऐसी ही उम्मीदें हैं कि कुछ ऐसी ही छाप छोड़ने वाली फिल्में देखने को मिलेंगी। फिल्मों को जीने वाले मुम्बई में बेहतरीन फिल्मों को लेकर आने वाले इस उत्सव को पहली बार मनाने के उत्साह के साथ फिर मिलने का वादा रहा।

उमेश पंत

उमेश पंत यात्राकार के संस्थापक-सम्पादक हैं। यात्रा वृत्तांत 'इनरलाइन पास' और 'दूर दुर्गम दुरुस्त' के लेखक हैं। रेडियो के लिए कई कहानियां लिख चुके हैं। पत्रकार भी रहे हैं। और घुमक्कड़ी उनकी रगों में बसती है।

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