फ़्लोरेंस की अनोखी मूर्तियां और पीसा की झुकी मीनार

किताबों के पन्ने पलटते हुए माइकलएंजिलो और गैलीलियो के नाम ज़िंदगी में आए और ज़िंदगी के पन्ने पलटते हुए आज मैं उनकी यादों के शहर में था. यूरोप के कई हिस्सों में घूम घाम के आज हम आ गए थे फ़्लोरेंस. 

फ़ोटो : उमेश पंत

इटली का यह शहर अपने आर्ट, कल्चर के लिए तो दुनिया भर में मशहूर है ही, खास तौर पर यूरोप में हुए रेनेसा यानी पुनर्जागरण की शुरुआत करने वाले शहर के तौर पर भी इसे जाना जाता है.

पियाजा डी सेंटा क्रूस

फ़ोटो : उमेश पंत

फ़्लोरेंस की अपनी यात्रा की शुरुआत हमने यहां के मशहूर चौक पियाजा डी सेंटा क्रूस से की. यहां हमारे सामने था मशहूर फ़्रांसीसी चर्च बेसिलिका डी सेंटा क्रूस. खास बात यह है कि यहां मशहूर मूर्तिकार माइकलएंजिलो और वैज्ञानिक गैलीलियो की क़ब्र भी बनी हैं. पास ही में फ़्लोरेंस की सेंट्रल लाइब्रेरी भी दिख रही थी.


डूओमो स्क्वायर

फ़ोटो : उमेश पंत

यहां से आगे बढ़े तो हम पहुंच गए डूओमो स्क्वायर पर. हमारे एकदम सामने था सेंटा मारिया देल फ़ियोरे. इस कथीड्रल की शानदार इमारत को देखकर कौन कह सकता है कि यह 11वीं सदी के मुख्य चर्च में से एक है. रंगीन संगमर का यह चर्च फ़्लोरेंस के आर्किटेक्चर की बानगी दे रहा था. यह चर्च अपने लाल गुंबद की वजह से भी एक अलग पहचान रखता है.


जिओतो क्लॉकटावर

फ़ोटो : उमेश पंत

चर्च की इमारत में एक क्लॉक टावर भी नज़र आ रहा था. जिओतो नाम का यह घंटाघर हरे और सफ़ेद संगमरमर का बना हुआ है और इसकी मीनार गोथिक स्टाइल की बनी है. इस टावर में सीढ़ियाँ भी बनी हैं जिनपर चढ़कर आप पूरे शहर का नज़ारा देख सकते हैं. पर अफ़सोस कि हमें समय की कमी के चलते यह मौक़ा नहीं मिला.

यहां से हम बढ़ गए अगले पियाज़ा यानी चौक की तरफ़. दुनिया के हर कोने से आए लोग यहां दिखाई दे रहे थे. इस वक़्त हम दुनिया के सबसे सुंदर शहरों में से एक में जो थे. 


पियाज़ा डेला सिग्नोरिया

फ़ोटो : उमेश पंत

अभी जहां हम खड़े थे उसका चौक का नाम था पियाज़ा डेला सिग्नोरिया. दूर से ही मशहूर मूर्तिकार माइकलएंजिलो की बनाई डेविड की मूर्ति नज़र आ रही थी. बाद में पता चला कि यह दरअसल उनकी बनाई असल मूर्ति की रेप्लिका है.

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इस चौक का नाम पड़ा यहां मौजूद इमारत पलाज़ो डेला साइनोरिया के नाम पर जो कि फ़्लोरेंस की सबसे अहम जगह में से एक है. फ़्लोरेंस के रिपब्लिक को गवर्न करने वाली बॉडी साइनोरिया का दफ़्तर यही इमारत है. यानी कि ये है फ़्लोरेंस का टाउन हॉल. फ़्लोरेंस की राजनीति में आज भी इस जगह की सबसे ज़्यादा अहमियत है. 

फ़ोटो : उमेश पंत

इस पियाज़ा में दिख रही ये जगह है लोजिया डेला सिग्नोरिया. इस ओपन एयर आर्ट गैलरी में कई मशहूर मूर्तियां हैं. सीड़ियों पर नज़र आती यह शेर की मूर्ति मेडीसीज़ लायन कहलाती है. 

दूसरी मूर्ति पेट्रोक्लस का शरीर अपने हाथ में उठाए मेनेलस की है. 

एक और मूर्ति जो अलग से नज़र आती है वो है मेड्यूसा की क़लम की हुई धड़ अपने हाथ में उठाए परसियस की. यह मूर्ति तांबे की बनी है और इसे बनाया है सेलिनी नाम के मशहूर मूर्तिकार ने. 

फ़ोटो : उमेश पंत

अगली मूर्ति सबाइन महिला के बलात्कार को दिखाती है.

फ़ोटो : उमेश पंत

मूर्तिकला की शानदार मिसाल पेश करने वाली इस जगह पर क़रीब दो घंटे बिताकर हम बढ़ गए आगे. 


उफ़ीजी गैलरी

फ़ोटो : उमेश पंत

हम उफ़ीजी गैलरी से गुज़रते हुए आर्नो नदी के किनारे आ गए. कुछ देर नदी किनारे हम फ़्लोरेंस को निहारते रहे और फिर वक़्त हो गया आगे बढ़ने का.

उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा था क्योंकि अब हमें जाना था पीसा की मीनार की तरफ़ जिसका नाम अब तक सिर्फ़ जीके और हिस्ट्री की किताबों में ही पढ़ा था.


पीसा की मीनार 

फ़ोटो : उमेश पंत

इसे देखने के लिए अब हम आ गए थे इटली के पिसा नाम के शहर में. इस वक़्त हम थे पियाज़ा डेई मिराकोली में. हमारे ठीक सामने थी पिसा की बपटिस्ट्री जिसके पीछे था कथीड्रल. 

फ़ोटो : उमेश पंत

इसी कथीड्रल के बग़ल में बनी है दुनिया के आश्चर्यों में से एक रही पीसा की झुकी हुई मीनार. यह मीनार बनने के बाद ही झुक गई थी और फ़िलहाल क़रीब 4 डिग्री तक झुकी हुई है. झुकी होने के कारण इसकी ऊँचाई एक तरफ़ से क़रीब 183 फ़ीट है तो दूसरी तरफ़ से 186 फ़ीट. यह वाकई एक आश्चर्य है कि इतनी झुकी होने के बावजूद भी यह मीनार अब तक टिकी हुई है.

आज पूरा दिन यूरोप की हैरतंगेज़ इमारतों और कलाकृतियों को देखने के नाम रहा. अब यह यात्रा अपने आख़री पड़ाव की तरफ़ बढ़ रही थी. 


यहां देखिए इस यात्रा का पूरा वीडियो

उमेश पंत

उमेश पंत यात्राकार के संस्थापक-सम्पादक हैं। यात्रा वृत्तांत 'इनरलाइन पास' और 'दूर दुर्गम दुरुस्त' के लेखक हैं। रेडियो के लिए कई कहानियां लिख चुके हैं। पत्रकार भी रहे हैं। और घुमक्कड़ी उनकी रगों में बसती है।

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