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हिमालयी चित्रों की घर वापसी – 170 साल बाद भारत लौटे श्लागिन्टवाइट बंधुओं के चित्रों की प्रदर्शनी
हिमालय (Himalayan paintings) सिर्फ एक पर्वतमाला भर नहीं है. वह मानवीय सभ्यता, यात्राओं, खोजों और स्मृतियों का एक जीवित दस्तावेज़ है. सदियों से यह पर्वतमाला यात्रियों, वैज्ञानिकों, इतिहासकारों और कलाकारों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है. आज, जब धरती को समझने के लिए हमारे पास सैटेलाइट, डिजिटल मैप्स और अनगिनत तकनीकें हैं, तब यह…

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छानी खरीकों में : Chhaani Kharikon mein
छानी खरीकों में – उत्तराखंड के भूले हुए गाँवों में 500 किलोमीटर पैदल यात्रा ‘छानी खरीकों में’ के बारे में : About ‘Chhani Kharikon mein’ अस्कोट-आराकोट अभियान’ एक ऐसी यात्रा है जो हर दस साल बाद आयोजित की जाती है और जिसका उद्देश्य उत्तराखंड के भौगोलिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिवर्तनों का अध्ययन करना होता…

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मोहन राकेश की कन्याकुमारी यात्रा का वृत्तांत : 100वीं जयंती पर विशेष
मशहूर कथाकार और यात्रा वृत्तांत लेखक मोहन राकेश की आज सौवीं जयंती है। ‘बंद अंधेरे कमरे’, ‘आधे अधूरे’ जैसे नाटक, ‘आषाढ़ का एक दिन’ जैसा उपन्यास’ और ‘आख़री चट्टान तक’ जैसा यात्रा वृत्तांत और शानदार कहानियाँ रचने वाले मोहन राकेश हिंदी साहित्य का एक बड़ा नाम हैं। इस मौके पर उनकी किताब ‘आँखरी चट्टान तक’…

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स्पेन की राजधानी मैड्रिड का मज़ेदार सफ़र
स्पेन की राजधानी मैड्रिड (Madrid city Spain)की यात्रा करते हुए भारतीय पत्रकार अखिल रंजन के अनुभव बहुत रोचक रहे। अखिल रंजन न्यूज़ एजेंसी एएफपी, बीबीसी और ट्विटर जैसे सस्थानों के लिए काम कर चुके हैं। वो गूगल जैसी संस्थाओं के लिए फ़ैक्ट चेकिंग टीम का हिस्सा भी रहे। भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता की…

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कच्छ कथा बयां करती है गुजरात की धरती पर हिंदू मुस्लिम एकता के अनूठे क़िस्से
गुजरात के कच्छ (Rann of Kutch Gujarat) पर कम किताबें लिखी गई हैं। अभिषेक श्रीवास्तव की ‘कच्छ कथा ‘ उन चुनिंदा किताबों में शुमार है जो इस इलाके की अनकही कहानियों को सामने लाती है। पेश है इस एथ्नोग्राफिक यात्रा आख्यान पर मंजीत ठाकुर की लिखी समीक्षा। किताबः कच्छ कथा लेखकः अभिषेक श्रीवास्तव प्रकाशनः राजकमल प्रकाशन मूल्यः…

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लपक के छूना हिमालय को : ब्रह्मताल ट्रेकिंग भाग-2
विनीता यशस्वी नैनीताल से हैं. खूब घुमक्कड़ी करती हैं और देखे गए नज़ारों को शानदार तस्वीरें में भी उकेरती हैं. उत्तराखंड के ब्रह्मताल ट्रेकिंग के अपने रोमांचक अनुभव को उन्होंने हमें लिख भेजा है. हिमालय की गोद में बसे इस ख़ूबसूरत इलाक़े से लौटकर लिखे वृत्तांत का दूसरा हिस्सा. पहला हिस्सा ये रहा. ब्रह्मताल…

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लपक के छूना हिमालय को : ब्रह्मताल ट्रेकिंग भाग-1
उत्तराखंड के ब्रह्मताल ट्रेकिंग (Brahmtal trek) के अपने रोमांचक अनुभव को हमें लिख भेजा है विनीता यशस्वी ने. विनीता यशस्वी नैनीताल से हैं. खूब घुमक्कड़ी करती हैं और देखे गए नज़ारों को शानदार तस्वीरें में भी उकेरती हैं. चमोली के पास लोहाजंग नाम की जगह से ब्रह्मताल की ट्रेकिंग शुरू होती है। हिमालय की गोद…

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नया यात्रा वृत्तांत- नास्तिकों के देश में: नीदरलैंड
प्रवीण झा नॉर्वे (यूरोप) में रहते हैं. हिन्दी लेखन में लगातार सक्रिय हैं. पेशे से डॉक्टर हैं और मन से यायावर. संगीत से जुड़े विषयों में उनकी खास रुचि रहती है. हाल ही में किंडल पर उन्होंने ‘नास्तिकों के देश में: नीदरलैंड’ नाम से एक रोचक यात्रा वृत्तांत लिखा है. इससे पहले एक यात्रा-संस्मरण- ‘भूतों के…

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पुर्तगाल -सर्द हवाओं में लिपटा अटलांटिक का किनारा
अपूर्वा अग्रवाल आईआईएमसी से पढ़ी हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया और बिज़नेस स्टैंडर्ड में पत्रकार रह चुकी हैं. फ़िलहाल जर्मनी में ‘डोयचे वेले’ के साथ काम कर रही हैं. जर्मनी के शहर कोलोन से शुरू हुई पुर्तगाल की यात्रा (Portugal visit) के क़िस्से अपूर्वा ने यात्राकार को भेजे हैं. आप भी घर बैठे उनके साथ पुर्तगाल…

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जर्मनी पर मनोहर श्याम जोशी की उड़ती नजर
मनोहर श्याम जोशी हिंदी में एक अलग तरह की क़िस्सागोई के लिए जाने जाते हैं। ख़ास चुटीला अन्दाज़ और उसमें व्यंग्य का अनूठा तड़का, आप एक बार पढ़ना शुरू करें तो फिर बीच में नहीं छोड़ सकते। आज ‘यात्राकार‘ पर पेश है क्याप, कसप, हरिया हरक्यूलिस की हैरानी जैसी मज़ेदार रचनाएं लिखने वाले जोशी जी के यात्रावृत्तांत ‘पश्चिमी जर्मनी पर…

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