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उत्तराखंड के कटारमल सूर्य मंदिर का सफ़र

कोणार्क के सूर्य मंदिर के बाद सबसे अहम है यह सूर्य मंदिर

(Last Updated On: February 13, 2022)

उत्तराखंड के कटारमल सूर्य मंदिर के बारे में आपने शायद ना सुना हो। कोणार्क के सूर्य मंदिर के बारे में अक्सर सभी लोग जानते हैं लेकिन उत्तराखंड के सूर्य मंदिर के बारे में ज़्यादा लोगों को जानकारी नहीं है। भारत में कुल 12 प्रमुख सूर्य मंदिर हैं जिनमें से अल्मोड़ा के कटारमल सूर्य मंदिर (katarmal sun temple) को दूसरा सबसे अहम सूर्य मंदिर माना जाता है।

अल्मोड़ा से क़रीब 18 किलोमीटर की दूरी पर कटारमल गाँव में मौजूद यह मंदिर कत्यूरी शैली का मंदिर है जिसे नवीं शताब्दी में कत्यूरी राजा कटारमल ने बनवाया था। कटारमल सूर्य मंदिर का इतिहास यह भी है कि इसे रात के वक्त बनाया गया था और बनाते-बनाते सुबह हो गई। कत्यूरी शासन में रात के अंधेरे में ही मंदिर बनाए जाते थे इसलिए इसे अधूरा ही छोड़ दिया गया।

मुख्य मंदिर जिसे गर्भग्रह कहा जाता है, क़रीब चालीस छोटे-बड़े मंदिरों के समूह के केंद्र में बना है। कटारमल मंदिर के मुख्य द्वार के सामने बने एक छोटे मंदिर में एक छिद्र बना है जिससे साल में दो बार सूर्य की पहली किरण सीधे गर्भग्रह में प्रवेश करती है, जिससे इसके स्थापत्य की विशिष्टता का पता चलता है। कहा जाता है कि यहाँ मौजूद दसवीं शताब्दी की एक मूर्ति को चोरी कर लिया गया था जिसके बाद गर्भग्रह के उत्कीर्णित काष्ठ के बने ख़ास दरवाज़े को सुरक्षा की दृष्टि से दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा गया है।

यह मंदिर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा संरक्षित है और इसे राष्ट्रीय महत्व की जगह माना गया है। मुख्य मंदिर के ऊपर ख़ास शैली में लकड़ी की छतरी बनी है जिसे छत्ररेखा शैली कहा जाता है। यह शैली कत्यूरी शासन में बने मंदिरों में अक्सर देखी जाती है जिसे कत्यूर शैली कहा जाता है।

इस वीडियो में देखिए उत्तराखंड के अल्मोड़ा में मौजूद कटारमल सूर्य मंदिर पहुँचने का तरीका और जानिए क्या है इस कटारमल सूर्य मंदिर का रहस्य।

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उमेश पंत

उमेश पंत यात्राकार के संस्थापक-सम्पादक हैं। यात्रा वृत्तांत 'इनरलाइन पास' और 'दूर दुर्गम दुरुस्त' के लेखक हैं। रेडियो के लिए कई कहानियां लिख चुके हैं। पत्रकार भी रहे हैं। और घुमक्कड़ी उनकी रगों में बसती है।

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