मीना झा की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के वृत्तांत
इस यात्रा ने मुझे क्षमा करना सिखाया
ऑस्ट्रेलिया की यात्रा का वृत्तांत
‘दी ग्रेट बैरियर रीफ़’ की समुद्री यात्रा का रोमांचक विवरण
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मशहूर कथाकार और यात्रा वृत्तांत लेखक मोहन राकेश की आज सौवीं जयंती है। ‘बंद अंधेरे कमरे’, ‘आधे अधूरे’ जैसे नाटक, ‘आषाढ़ का एक दिन’ जैसा उपन्यास’ और ‘आख़री चट्टान तक’ जैसा यात्रा वृत्तांत और शानदार कहानियाँ रचने वाले मोहन राकेश हिंदी साहित्य का एक बड़ा नाम हैं। इस मौके पर उनकी किताब ‘आँखरी चट्टान तक’…
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मनोहर श्याम जोशी हिंदी में एक अलग तरह की क़िस्सागोई के लिए जाने जाते हैं। ख़ास चुटीला अन्दाज़ और उसमें व्यंग्य का अनूठा तड़का, आप एक बार पढ़ना शुरू करें तो फिर बीच में नहीं छोड़ सकते। आज ‘यात्राकार‘ पर पेश है क्याप, कसप, हरिया हरक्यूलिस की हैरानी जैसी मज़ेदार रचनाएं लिखने वाले जोशी जी के यात्रावृत्तांत ‘पश्चिमी जर्मनी पर…
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ट्रैवल बुक रिव्यू : तुम्हारा नाम क्या है तिब्बत, चंद्रभूषण ( अंतिका प्रकाशन) समीक्षक : गीता श्री [dropcap]प[/dropcap]त्रकार चंद्रभूषण जी की यात्रा पुस्तक “ तुम्हारा नाम क्या है तिब्बत “ ( अंतिका प्रकाशन) मंगा ली . तिब्बत नाम मुझे खींच रहा था. आख़िर एक पत्रकार दूसरे पत्रकार का लिखा कैसे न पढ़ें वो भी उस…
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प्रवीण झा नॉर्वे (यूरोप) में रहते हैं. हिन्दी लेखन में लगातार सक्रिय हैं. पेशे से डॉक्टर हैं और मन से यायावर. संगीत से जुड़े विषयों में उनकी खास रुचि रहती है. हाल ही में किंडल पर उन्होंने ‘नास्तिकों के देश में: नीदरलैंड’ नाम से एक रोचक यात्रा वृत्तांत लिखा है. इससे पहले एक यात्रा-संस्मरण- ‘भूतों के…
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पाठकीय समीक्षा : दूर दुर्गम दुरुस्त (Door Durgam Durust review) संयोग बड़े मजेदार होते है, सच में. आठ-दस दिन में दूसरी बार ये एहसास हुआ. उमेश पंत की पूर्वोत्तर यात्रा वाली किताब परसों दोपहर घर आई. कल शाम तक उनके साथ असम, अरूणाचल, नागालैंड और मणिपुर में था. गुवाहाटी से दिल्ली के लिये उनकी फ़्लाइट…
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ट्रैवल बुक रिव्यू : कुछ इधर ज़िंदगी कुछ उधर ज़िंदगी, गीता श्री समीक्षक : कुमार सुशांत कुछ महीने पहले गीताश्री की एक पुस्तक आयी है जिसका नाम है “कुछ इधर ज़िंदगी कुछ उधर ज़िंदगी।” यह पुस्तक उतनी चर्चित नहीं हुई जितनी अमूमन गीताश्री की पुस्तकें होती हैं। दरअसल यह पुस्तक यात्रा संस्मरण है।…
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