पाठकीय समीक्षा : दूर दुर्गम दुरुस्त (Door Durgam Durust review) संयोग बड़े मजेदार होते है, सच में. आठ-दस दिन में दूसरी बार ये एहसास हुआ. उमेश पंत की पूर्वोत्तर यात्रा वाली किताब परसों दोपहर घर आई. कल शाम तक उनके साथ असम, अरूणाचल, नागालैंड और मणिपुर में था. गुवाहाटी से दिल्ली के लिये उनकी फ़्लाइट…