सफ़र जारी रखें

3 Comments

  1. पिछले साल ही हो कर आये हैं यहाँ से..यादें ताजा हुई..बिल्कुल सही लिखा.

  2. भक्ति दरअसल हमारी शांत मनोस्थिति और आत्म्संयमित होने का परिचायक है.. जब-जब हम अपने करीब होते हैं, हम उस शक्ति के भी करीब होते हैं जो सम्पूर्ण श्रृष्टि को नियंत्रित किये हुए है.. त्रयम्बकेश्वर जैसी जगह जाना जीवन में अपने ही करीब आने का मौका देने जैसे अवसर होते हैं.. दरअसल वहां केवल भक्ति ही नहीं होगी, बहुत कुछ मतलब और ज़रूरत से संचालित भी होगा, लेकिन चूँकि हम अब सब कुछ अच्छा देखते और महसूस करते हैं, इसलिए भी वहां सब इश्वर की भक्ति में डूबे नज़र आते हैं.. ऐसी यात्राएं करना सुखद अनुभव रहता है… मुबारक!

  3. भक्ति दरअसल हमारी शांत मनोस्थिति और आत्म्संयमित होने का परिचायक है.. जब-जब हम अपने करीब होते हैं, हम उस शक्ति के भी करीब होते हैं जो सम्पूर्ण श्रृष्टि को नियंत्रित किये हुए है.. त्रयम्बकेश्वर जैसी जगह जाना जीवन में अपने ही करीब आने का मौका देने जैसे अवसर होते हैं.. दरअसल वहां केवल भक्ति ही नहीं होगी, बहुत कुछ मतलब और ज़रूरत से संचालित भी होगा, लेकिन चूँकि हम अब सब कुछ अच्छा देखते और महसूस करते हैं, इसलिए भी वहां सब इश्वर की भक्ति में डूबे नज़र आते हैं.. ऐसी यात्राएं करना सुखद अनुभव रहता है… मुबारक!

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