उस शाम जब मुझे लगा कि मैंने ज़िंदगी की सबसे बड़ी ग़लती कर दी है

कंचन पंत : 11 नवंबर की उस शाम मैं धौलीधार रेंज की एक पहाड़ी के ऊपर खामोश बैठी थी। मेरे देखते-देखते सूरज सामने पहाड़ी के…
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