पाठकीय समीक्षा : दूर दुर्गम दुरुस्त (Door Durgam Durust review) संयोग बड़े मजेदार होते है, सच में. आठ-दस दिन में दूसरी बार ये एहसास हुआ. उमेश पंत की पूर्वोत्तर यात्रा वाली किताब परसों दोपहर घर आई. कल शाम तक उनके साथ असम, अरूणाचल, नागालैंड और मणिपुर में था. गुवाहाटी से दिल्ली के लिये उनकी फ़्लाइट…
बुक रिव्यू : वह बह कोई देस है महाराज, अनिल कुमार यादव समीक्षक : अविनाश मिश्र अनिल कुमार यादव ने उत्तर-पूर्व की अपनी लम्बी यात्रा पर एक शानदार किताब लिखी थी ‘वह भी कोई देस है महाराज’। हिंदी के कुछ चुनिंदा यात्रा-वृत्तांतों का ज़िक्र करना हो तो इस किताब का नाम लिए बिना वह…
किताब : इनरलाइन पास – यात्रा वृत्तांत (Innerline Pass by Umesh Pant) समीक्षा : श्रीश के पाठक बड़ी मुश्किल से हम गर्भ के कोकून से निकलते हैं और फिर ज़िन्दगी की ज़द्दोज़हद से लड़ते-भिड़ते पुनः एक कम्फर्ट जोन का कोकून गढ़ लेते हैं l ये जड़ता तभी टूटती है कभी-कभी जब हम टूर पर…