किताब : इनरलाइन पास – यात्रा वृत्तांत (Innerline Pass by Umesh Pant) समीक्षा : श्रीश के पाठक बड़ी मुश्किल से हम गर्भ के कोकून से निकलते हैं और फिर ज़िन्दगी की ज़द्दोज़हद से लड़ते-भिड़ते पुनः एक कम्फर्ट जोन का कोकून गढ़ लेते हैं l ये जड़ता तभी टूटती है कभी-कभी जब हम टूर पर…