जगमग शहर में अंधेरे से जूझते हुए

नोट: यह लेख नवभारत टाइम्स (5 दिसंबर 2015) के सम्पादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ है. मूल रूप से लिखा गया पूरा लेख यहां पेश है. …

‘मैट्रो’की नयी भाषा सीखती एक मैट्रोसिटी

Mumbai Diary (23  Jun 2014) तकरीबन साड़े तीन महीने बाद मुम्बई लौटा हूं। दिल्ली की लू के बनिस्पत मुम्बई की ठन्डी हवाएं राहत देने वाली…

आख़री सांसें लेती ज़िंदगी की कहानी

Mumbai Diary : 14 (Mumbai Film Festival 2012) पिछले पांच दिनों से मुम्बई के पांच अलग अलग थियेटरों का पीछा किया है। हर थियेटर जैसे…

कभी कभी लगता है लोग अजनबी क्यों होते हैं ?

मुंबई डायरी: १ (जून 2011) कुछ दिन पहले हिन्दी की जानी मानी वैबसाईट मोहल्लालाईव के सम्पादक अविनाश जी ने फेसबुक पे पिंग किया। न हैलो।…

‘एक सौ दर्द जले जब दिल में, एक नज़्म का जन्म हुआ’

गुलज़ार  साहब को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने की बधाई देते हुए मोहल्ला लाइव पर छपने वाली अपनी ‘मुंबई डायरी’ में से एक दिन जो…
error: Content is protected !!