जगमग शहर में अंधेरे से जूझते हुए

नोट: यह लेख नवभारत टाइम्स (5 दिसंबर 2015) के सम्पादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ है. मूल रूप से लिखा गया पूरा लेख यहां पेश है. …

मोदी जी याद रखियेगा जहां में नूरजहां और भी हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल अपने मन की बात में सोलर लालटेन की मदद से गाँव को रौशन करने वाली कानपुर के दरियांव की ‘नूरजहां’…

हम अपने भीतर के कट्टरपंथ को फांसी क्यों नहीं दे देते ?

ऐसे मौकों पर मैं खुद को बहुत अकेला और उदास पाता हूं। मुझे नहीं पता होता कि मैं किस तरफ खड़ा होउं। मैं अपने आपको…

अब उन पहाड़ी मैगी पॉइंट्स का क्या होगा ?

डियर मैगी, कल जब किराने की दूकान में गया तो जाते ही कहा…आंटी मैगी..ये कहते ही मुझको रुकना पड़ा..न चाहते हुए भी.. तुम वहीं शेल्फ…

क्यों वीरान हो गई पहाड़ की बाखलियां

पिछले कुछ सालों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था में जिन क्षेत्रों का बोलबाला रहा उनमें कंस्ट्रक्शन, मैन्यूफैक्चरिंग और जलविद्युत ऊर्जा प्रमुख हैं। बीते दौर में कलकारखानों…

कहीं दराती बीमार तो नहीं कर रही ?

विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने बनाये पहाड़ी खेती के लिये नये उपकरण, उपकरणों में लकड़ी की जगह रबर और, लोहे के प्रयोग पर दिया…

क्या सचमुच सम्भव है ‘नेट न्यूट्रेलिटी’ ?

जनाब आप किस नेट न्यूट्रेलिटी की बात कर रहे हैं ? क्या सचमुच नेट पर न्यूट्रेलिटी या इन्टरनेट तटस्थता जैसी कोई चीज़ सम्भव है ?…

सिनेमा : शटर से थियेटर तक

मैं इस वक्त उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में हूं।अपने ननिहाल में।कुछ हफ्ते भर पहले रिलीज़ हुई एनएच 10 देखने का मन है।पर अफ़सोस कि मैं उसे…

महत्वाकांक्षाओं का ‘आप’निवेशिक काल

ये राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का ‘आप’निवेशिक काल था. वो धारा जो न दक्षिणपंथी लगती थी, न वामपंथी अब वो ‘कमीनपंथी’ पर उतर आई थी. पार्टी बनाने…

आपकी अदालत में आपके लिये भी तो कोई कठघरा हो

“और ये जो नया काम आपने शुरु किया है ज़रा बताइये कि इसका न्यूज़रुम से क्या सरोकार है ? इस नये काम को क्या कहते…

कितना जायज़ है मौत का मज़ाक

इस बीच फेसबुक पर दो मसलों को लेकर प्रतिक्रियाओं का अनवरत दौर जारी है। बाला साहब ठाकरे का देहावसान और अजमल कसाब को गुपचुप दी…

जिन्दगी की कोचिंग क्लास हैं स्टीव जौब्स की बातें

स्टीव जौब्स का व्यकितत्व मुझे जिन्दगी की कोचिंग क्लास की तरह लगता है। उनके बारे में पढ़ते चले जाना जि़न्दगी को सीखते चले जाने की…

अफवाहें गढ़ती वर्चुअल दुनिया

फेसबुक जैसी नेटवर्किंग सार्इट पर फैली अफवाह ने बैंग्लौर से लगभग 3 हज़ार उत्तर भारतीय लोगों को अपने अपने घरों की ओर जाने को मजबूर…

उधारी की मौज और परेशानियों की नकदी

मुम्बर्इ में नया नया आया था तो टीवी के एक लेखक से मिलने गया। लोखंडवाला की पौश कौलानी में टूबीएचके लेकर अकेले रहते थे। मतलब…

मैने दिल से कहा, ढूंढ़ लाना खुशी…

मैने दिल से कहा ढ़ूंढ़ लाना खुशी……कल मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक नीलेश मिस्रा के लिखे गीत की इन पंकितयों को सुनते हुए अचानक खयाल…

जीविका से जुड़ी आम आदमी की फिल्में

वृत्त्चित्रों को लेकर भारत में अपेक्षाकृत ठीक ठाक काम होता है लेकिन उनके प्रदर्शन को लेकर उतने प्रयास नहीं दिखाई देते। शहरी इलाकों में कभी…

जनस्वास्थ्य पर भारी पड़ता कौमनवैल्थ

हैल्थ इज वैल्थ। इस जुमले का भरपूर प्रयोग आप हम अपने जीवन में भले ही कई बार करते हैं किन्तु स्वास्थ्य सम्बन्धी नीतियों के मामले…

बांधों का विरोध करते फिल्मकार और फिल्में

बड़े बांधों को बनाये जाने को लेकर दुनिया भर में चर्चाएं हो रही हैं। विश्वभर में कुलमिलाकर 47665 छोटे बड़े बांध हैं जिनमें से सबसे…

पंचेश्वर- टूटती उम्मीदों का बांध

पंचेश्वर बांध इन दिनों उत्तराखंड में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और संभावित डूब क्षेत्र के इलाकों में ये बांध प्रतिरोध को भी जन्म…

धारावाहिकों में लौटता सामाजिक सन्देश

भारत में टेलीविजन पर मनोरंजन परक कार्यक्रमों की शुरुआत सोप ओपरा से हुई। 1985 में मनोहर श्याम जोशी द्वारा लिखा गया धारावाहिक हम लोग पहला…

आज का समाज और जनआन्दोलन

रंजना कुमारी ,निदेशक, सेन्टर फार सोशल रिसर्चलोकतंत्र में जनआन्दोलनों की भूमिका काफी अहम रही है। यह भूमिका आज के दौर में बढ़ गई है। आज…

मीडिया बनाम जनस्वास्थ्य

जनस्वास्थ्य एक ऐसा मुद्दा है जो भारतीय मीडिया में अछूत सी हैसियत रखता है इसीलिये एनडीटीवी इन्डिया पर स्वास्थ्य पर फीचर देखकर एकबारगी हैरानी हुई…
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