मुनस्यारी के मोड़ों पर हमारे लिए ट्विस्ट था : भाग-2

लतिका जोशी पत्रकार हैं. उत्तराखंड से हैं. कहानियां और कविताएं भी लिखती हैं. उनकी यात्राओं के क़िस्से पहले भी यात्राकार

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दार्जिलिंग मेरे बचपन का स्विट्ज़रलैंड है : भाग-3

प्रतीक्षा रम्या कोलकाता में रहती हैं. पत्रकारिता की छात्रा रही हैं. उन्होंने कोलकाता से दार्जिलिंग की अपनी यात्रा की कहानी

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नया यात्रा वृत्तांत- नास्तिकों के देश में: नीदरलैंड

प्रवीण झा नॉर्वे (यूरोप) में रहते हैं. हिन्दी लेखन में लगातार सक्रिय हैं. पेशे से डॉक्टर हैं और मन से

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दार्जिलिंग मेरे बचपन का स्विट्ज़रलैंड है : भाग-2

प्रतीक्षा रम्या कोलकाता में रहती हैं. पत्रकारिता की छात्रा रही हैं. उन्होंने कोलकाता से दार्जिलिंग की अपनी यात्रा की कहानी

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दार्जिलिंग मेरे बचपन का स्विट्ज़रलैंड है : भाग-1

प्रतीक्षा रम्या कोलकाता में रहती हैं. पत्रकारिता की छात्रा रही हैं. उन्होंने कोलकाता से दार्जिलिंग की अपनी यात्रा की कहानी

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रवीश कुमार की अमरीका यात्रा : भाग 2

रवीश कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और एनडीटीवी से जुड़े हैं. हाल ही में उन्होंने अमरीका की यात्रा की. अपनी इस

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रवीश कुमार की अमरीका यात्रा : भाग -1

रवीश कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और एनडीटीवी से जुड़े हैं. हाल ही में उन्होंने अमरीका की यात्रा की. अपनी इस

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किलों और महलों का शहर है प्राग

तृप्ति शुक्ला मीडिया से जुड़ी हैं. अक्सर मुस्कुराती हुई नज़र आती हैं. फ़ेसबुक पर अपने ‘क्वर्की वन लाइनर्स’ के लिए

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सर्द हवाओं में लिपटा अटलांटिक का किनारा

अपूर्वा अग्रवाल आईआईएमसी से पढ़ी हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया और बिज़नेस स्टैंडर्ड में  पत्रकार रह चुकी हैं. फ़िलहाल जर्मनी में

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रात में जादुई नगरी लगने लगता है बुडापेस्ट

तृप्ति शुक्ला मीडिया से जुड़ी हैं. अक्सर मुस्कुराती हुई नज़र आती हैं. फ़ेसबुक पर अपने ‘क्वर्की वन लाइनर्स’ के लिए

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पोलैंड की वो राजधानी, जहां लोग ख़्वाब जी रहे थे

तृप्ति शुक्ला मीडिया से जुड़ी हैं. अक्सर मुस्कुराती हुई नज़र आती हैं. फ़ेसबुक पर अपने ‘क्वर्की वन लाइनर्स’ के लिए

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ऐसे होता था भारत और तिब्बत के बीच व्यापार

सुशील बहुगुणा वरिष्ठ पत्रकार हैं और एनडी टीवी से जुड़े हैं. खासतौर पर पर्यावरण से जुड़े विषयों पर उन्होंने कई

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प्रेम की एक कहानी है ‘गोरंग देस से गंगोत्री’

किशोर चंद्र पाटनी, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में गोरंगचौड़ नाम की जगह पर राजनीति विज्ञान के प्रवक्ता हैं. उनकी एक

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जर्मनी पर मनोहर श्याम जोशी की उड़ती नजर

मनोहर श्याम जोशी हिंदी में एक अलग तरह की क़िस्सागोई के लिए जाने जाते हैं। ख़ास चुटीला अन्दाज़ और उसमें व्यंग्य का अनूठा

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कहानी उस ‘देस’ की जहाँ समय स्थिर है और आदमी खर्च हो रहा है

अविनाश मिश्र : भाषा को बहुत सावधानी और ख़ूबसूरती से बरतने वाले समकालीन युवा लेख़कों में अविनाश मिश्र एक जाना-पहचाना

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ब्रेख्त और एक उदास नगर

हिंदी यात्रा-लेखन की परम्परा में निर्मल वर्मा एक बड़ी अहम कड़ी हैं। आज यात्राकार पर पढ़िए उनके यात्रा वृत्तांत ‘चीडों

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मोहन राकेश और एक आख़री चट्टान

मोहन राकेश : वांडर लस्ट खुला समुद्र-तट। दूर-दूर तक फैली रेत। रेत में से उभरी बड़ी-बड़ी स्याह चट्टानें। पीछे की

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निर्मल वर्मा की प्रयाग यात्रा

निर्मल वर्मा : प्रयाग : 1976 मुँह अँधेरे सीटी सुनाई देती है-घनी नींद में सुराख बनाती हुई-एक क्षण पता नहीं

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मोरक्कन घुमक्कड़ इब्न बतूता की भारत यात्रा

मोरक्कन यात्री इब्नबतूता का जन्म 24 फरवरी 1304 ई. को हुआ था। इनका पूरा नाम अबू अब्दुल्ला मुहम्मद था। इब्बनबतूता

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अज्ञेय ने देखी एक बूँद जो सहसा उछली

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय : घुम्मकड़ी एक प्रवृत्ति ही नहीं, एक कला भी है। देशाटन करते हुए नये देशों में

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